भारत के 10 महान शासक
भारत महान शासकों का देश रहा है. अलग-अलग काल में एक से बढ़कर एक राजाओं ने भारत पर राज किया है और आज हम आपके साथ ऐसे ही दस शाशकों की सूचि प्रस्तुत कर रहे है.इस सूचि को शासक के द्वारा विस्तार किये गए राज्य की सीमा और उनका भारत की जनता और देश की संस्कृति पर जो असर हुआ है उसे ध्यान में रख कर बनाया गया है. और हमने सिर्फ सामरिक क्षमता ही नहीं अपितु राजकुशलता और जनता के प्रति कल्याण भाव रखने वाले राजाओं को वरीयता दी है. 1. अजातशत्रु- 491 BC अजातशत्रु मगध पर राज्य करते थे और वह हर्यंका वंश से थे. उनके पिता सम्राट बिम्बिसार थे अजातशत्रु ने अपने पिता को बंदी बना कर सत्ता हासिल कर ली. अजातशत्र... more »
राजपूत क्या है
राजपूतों के इतिहास के बारे में अभिलेखों एवं समकालीन तथा बाद के कुछ साहित्यों से जानकारी मिलती है। अभिलेखों में ग्वालियर एवं ऐहोल अभिलेख तथा साहित्य में नयचन्द्रसूरि का 'हम्मीर महाकाव्य', पद्मगुप्त का 'नवसाहसांकचरित', हलायुध की 'पिंगलसूत्रवृति', 'कुमारपाल चरित', 'वर्ण रत्नाकार' एवं पृथ्वीराजरासो आदि प्रमुख है। राजपूत का अर्थ राजपूत शब्द संस्कृत के 'राजपुत्र' का अपभ्रंश है। सामान्यत: इसका अर्थ होता है, 'राजा का पुत्र' या शाही परिवार के किसी व्यक्ति का 'राजपुत्र'। सम्भवतः प्राचीन काल में इस शब्द का प्रयोग किसी जाति के रूप में न करके राजपरिवार के सदस्यों के लिए किया जाता था, पर हर्ष की ... more »
रानी पदमिनी की कहानी
[image: रानी पदमिनी] रानी पदमिनी के पिता का नाम गंधर्वसेन और माता का नाम चंपावती था | रानी पद्मिनी के पिता गंधर्वसेन सिंहल प्रान्त के राजा थे |बचपन में पदमिनी के पास “हीरामणी ” नाम का बोलता तोता हुआ करता था जिससे साथ उसमे अपना अधिकतर समय बिताया था | रानी पदमिनी बचपन से ही बहुत सुंदर थी और बड़ी होने पर उसके पिता ने उसका स्वयंवर आयोजित किया | इस स्वयंवर में उसने सभी हिन्दू राजाओ और राजपूतो को बुलाया | एक छोटे प्रदेश का राजा मलखान सिंह भी उस स्वयंवर में आया था | राजा रावल रतन सिंह भी पहले से ही अपनी एक पत्नी नागमती होने के बावजूद स्वयंवर में गया था | प्राचीन समय में राजा एक से अधिक विवा... more »
महाराणा प्रताप पर एक कविता
[image: महाराणा प्रताप] राणा प्रताप इस भरत भूमि के, मुक्ति मंत्र का गायक है। राणा प्रताप आज़ादी का, अपराजित काल विधायक है।। वह अजर अमरता का गौरव, वह मानवता का विजय तूर्य। आदर्शों के दुर्गम पथ को, आलोकित करता हुआ सूर्य।। राणा प्रताप की खुद्दारी, भारत माता की पूंजी है। ये वो धरती है जहां कभी, चेतक की टापें गूंजी है।। पत्थर-पत्थर में जागा था, विक्रमी तेज़ बलिदानी का। जय एकलिंग का ज्वार जगा, जागा था खड्ग भवानी का।। लासानी वतन परस्ती का, वह वीर धधकता शोला था। हल्दीघाटी का महासमर, मज़हब से बढकर बोला था।। राणा प्रताप की कर्मशक्ति, गंगा का पावन नीर हुई। राणा प्रताप की देश... more »
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राठौर वंश
राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल है जो कि राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजपूत या क्षत्रयि वर्ण क्रम (1 ब्राहण 2 क्षत्रिय 3 वैश्य 4 शुद्र) मे दूसरा स्थान है राजस्थान को ब्रिटिश काल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी, किन्तु बाद में इन वर्णों के अंतर्गत अनेक जातियाँ बन गईं। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। राजपूतों की उत्पत्ति- राजपूत वंश की उत्पत्ति के विषय में विद्धानों के दो मत प्रचलित हैं- एक का मानना है कि राजपूतों की उ... more »
तोमर वंश
*तोमर* या *तंवर* उत्तर-पश्चिम भारत का एक राजपूत वंश है। तोमर राजपूत क्षत्रियो में चन्द्रवंश की एक शाखा है और इन्हें पाण्डु पुत्र अर्जुन का वंशज माना जाता है इनका गोत्र *अत्रीश* होता है, जो कि अत्रि ऋषि से चला है। उत्तर मध्य काल में ये वंश बहुत ताकतवर वंश था और उत्तर पश्चिमी भारत के बड़े हिस्से पर इनका शाशन था। देहली जिसका प्राचीन नाम ढिल्लिका था, इस वंश की राजधानी थी और उसकी स्थापना का श्रेय इसी वंश को जाता है। परिचयराजपूतों में तोमर वंश अपना अहम स्थान रखता है। पुराणों से प्रतीत होता है कि आरंभ में तोमरों का निवास हिमालय के निकटस्थ किसी उत्तरी प्रदेश में था। किंतु १०वीं शताब्दी तक... more »
राजपूतों की वंशावली
[image: राजपूतों की वंशावली] "दस रवि से दस चन्द्र से बारह ऋषिज प्रमाण,चार हुतासन सों भये कुल छत्तिस वंश प्रमाणभौमवंश से धाकरे टांक नाग उनमानचौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण." अर्थ:-दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय दस चन्द्र वंशीय,बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है,बाद में भौमवंश नागवंश क्षत्रियों को सामने करने के बाद जब चौहान वंश चौबीस अलग अलग वंशों में जाने लगा तब क्षत्रियों के बासठ अंशों का पमाण मिलता है। सूर्य वंश की दस शाखायें:- १. कछवाह२. राठौड ३. बडगूजर४. सिकरवार५. सिसोदिया ६.गहलोत ७.गौर ८.गहलबार ९.रेकबार १०.जुनने चन्द्र वंश की दस शाखायें:- १.जा...more »
दासी भारमली
[image: दासी भारमली] आपने जोधपुर की रूठी रानी के बारे में पढ़ते हुए उसकी दासी भारमली का नाम भी पढ़ा होगा | जैसलमेर की राजकुमारी उमादे जो इतिहास में रूठी रानी के नाम से प्रसिद्ध है अपनी इसी रूपवती दासी भारमली के चलते ही अपने पति जोधपुर के शक्तिशाली शासक राव मालदेव से रूठ गई थी और मालदेव के लाख कोशिश करने के बाद भी वह आजीवन अपने पति से रूठी ही रही | जोधपुर के राव मालदेव का विवाह जैसलमेर के रावल लूणकरणजी की राजकुमारी उमादे के साथ हुआ था | सुहागरात्रि के समय उमादे को श्रृंगार करते देर हो गई तो उसने अपनी दासी भारमली को कुछ देर के लिए मालदेव जी का जी बहलाने के लिए भेजा | भारमली इतनी सुन्... more »
छत्रपति शिवाजी
[image: छत्रपति शिवाजी] *भा*रतभूमि हमेशा ही वीरों की जननी रही है. यहां समय-समय पर ऐसे वीर हुए जिनकी वीर गाथा सुन हर भारतवासी का सीना गर्व से तन जाता है. भारतभूमि के महान वीरों में एक नाम वीर छत्रपति शिवाजी का भी आता है जिन्होंने अपने पराक्रम से औरंगजेब जैसे महान मुगल शासक की सेना को भी परास्त कर दिया था. एक महान, साहसी और चतुर हिंदू शासक के रूप में छत्रपति शिवाजी को यह जग हमेशा याद करेगा. कम साधन होने के बाद भी छत्रपति शिवाजी ने अपनी सेना को एक संयोजित ढंग से रण में माहिर बनाया. अपनी बहादुरी, साहस एवं चतुरता से उन्होंने औरंगजेब जैसे शक्तिशाली मुगल सम्राट की विशाल सेना से कई बार जोरद... more »
पाबू जी राठौड़ भाग 1
वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। विवाह संस्कार उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है - विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध हो... more »
राजपूताना समाज मे शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा पाबू जी राठौड़ भाग 2
[image: राजपूताना समाज मे शादी में सात की जगह चार फेरों की परम्परा पाबू जी राठौड़ भाग 2] भाद्रपद मास की बरसात सी झूमती हुई एक बारात जा रही थी। उसकी बारात जिसने विवाह पहले ही सूचना दे दी थी कि- ' मेरा सिर तो बिका हुआ है , विधवा बनना है तो विवाह करना !' उसकी बारात जिसने प्रत्युतर दिया था - जिसके शरीर पर रहने वाला सिर उसका नहीं है , वह अमर है।उसकी पत्नी को विधवा नहीं बनना पड़ता। विधवा तो उसको बनना पड़ता है जो पति का साथ छोड़ देती है । ढोली दुहे गा रहा था - धरती तूं संभागणी ,(थारै) इंद्र जेहड़ो भरतार। पैरण लीला कांचुवा , ओढ़ण मेघ मलार।। रंग आज आणन्द घणा, आज सुरंगी नेह। सखी अमिठो गोठ में , ... more »
History Of Rajputana
*राजपूत* राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल। यह नाम राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान में राजपूतों के अनेक किले हैं। राठौर, कुशवाहा, सिसोदिया, चौहान, जादों, पंवार आदि इनके प्रमुख गोत्र हैं। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी, किन्तु बाद में इन वर्णों के अंतर्गत अनेक जातियाँ बन गईं। क्षत्रिय वर्ण की अनेक जातियों और उनमें समाहित कई देशों की विदेशी जातियों को कालांतर में राजपूत जाति कहा जाने लगा। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के रा... more »
Biography of Sachin Tendulkar
Sachin Tendulkar was born April 24, 1973, in Bombay, India. Introduced to cricket at age 11, Tendulkar was just 16 when he became India's youngest Test cricketer. In 2005, he became the first cricketer to score 35 centuries (100 runs in a single inning) in Test play. In 2008, he reached another major milestone by surpassing Brian Lara's mark of 11,953 Test runs. Tendulkar took home the World Cup with his team in 2011, and wrapped up his record-breaking career in 2013. Early Years Largely considered cricket's greatest batsman, Sachin Tendulkar was born April 24, 1973, in Bombay, In... more »
Biography of Dr. A.P.J. Abdul Kalam
Bharat Ratna Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam, generally known as Dr. A.P.J. Abdul Kalam, was the 11th President of India (2002-07). He was elected against Lakshmi Sehgal in 2002 and had support from both the Bharatiya Janata Party and the Indian National Congress, the two leading parties of Indian politics. By profession he was a scientist and an administrator in India. He worked with Indian Space Research Organisation (ISRO) and Defense Research and Development Organisation (DRDO) as an aerospace engineer before becoming the President of India. His work on the development of la... more »
Biography of Atal Bihari Vajpayee
Atal Bihari Vajpayee is a highly respected veteran politician who had served as the Prime Minister of India in three non-consecutive terms. He was a member of the Indian Parliament for almost five decades; in fact he is the only parliamentarian who had been elected from four different states at different times, namely, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Gujarat and Delhi. He made his foray into politics during the pre-independence era when he took part in the Quit India Movement which led to his arrest and imprisonment. A true patriot, he was one of the founding members of the erstwhile... more »
Biography of Narendra Modi
Narendra Modi’s inspiring life journey to the Office of Prime Minister began in the by-lanes of Vadnagar, a small town in North Gujarat’s Mehsana district. He was born on the 17th of September 1950; three years after India had gained its Independence. This makes him the first Prime Minister to be born in independent India. Mr. Modi is the third child born to Damodardas Modi and Hiraba Modi. Mr. Modi comes from a family of humble origins and modest means. The entire family lived in a small single storey house which was approximately 40 feet by 12 feet. Narendra Modi’s formative years ... more »
Biography of Sri Krishna
krishna Sri Krishna is the central figure of the Hindu Bhagavad Gita. Sri Krishna is widely considered to be an Avatar – a direct descent of God. Krishna is one of the many names of Lord Vishnu, and Sri Krishan is considered to be an incarnation of Lord Vishnu. Sri Krishna said in the opening section of the Bhagavad Gita: “Whenever, O descendant of Bharata, righteousness declines and unrighteousness prevails, I manifest Myself. For the protection of the righteous and the destruction of the wicked, and for the establishment of religion, I come into being from age to age.” – Sri Kris... more »











